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Monday, 24 June 2013

Har ek khone har ek pane me teri yaad aati hai..!!



Har ek khone har ek pane me teri yaad aati hai,
Namak aankho me ghul jane me teri yaad aati hai,
Teri amrit bhari lehro ko kya malum ganga maa,
Samundar paar veerane me teri yaad aati hai,

Har ek khali pade aalind teri yaad aati hai,
Subah ke khwab ke manind teri yaad aati hai,
Hello , hey , hii kahta hai nahi aati magar,
Koi kahta hai jab jai hind teri yaad aati hai,

Sujhaye maa jo muhurat teri yaad aati hai,
Hanse gar budhh ki murat to teri yaad aati hai,
Kahi dollar ke piche chup gaye bharat ke noto par,
Dikhe gandhi ki jab surat toh teri yaad aati hai,

Koi dekhe janam-patri toh teri yaad aati hai,
Koi rag rag me savitri toh teri yaad aati hai,
Achanak muskilon me hath jode aankh munde jab,
Koi japta hai gaytri toh teri yaad aati hai,

Agar mausam ho manbhawan toh teri yaad aati hai,
Jhare megho se gar saawan toh teri yaad aati hai,
Kahi rahman ki jai ho sunkar garv ke aansu,
Kare jab paawan toh teri yaad aati hai..!!

मै तुम्हे ढूंढने स्वर्ग के द्वार तक..!!



मै तुम्हे ढूंढने स्वर्ग के द्वार तक
रोज़ जाता रहा , रोज़ आता रहा
तुम गज़ल बन गई, गीत में ढल गई
मंच से मै तुम्हे गुनगुनाता रहा

ज़िन्दगी के सभी रास्ते एक थे
सबकी मंज़िल तुम्हारे चयन तक रही
अप्रकाशित रहे पीर के उपनिषद्
मन की गोपन कथाएँ नयन तक रहीं
प्राण के प्रश्न पर प्रीति की अल्पना
तुम मिटाती रहीं मै बनाता रहा
तुम गज़ल बन गई, गीत में ढल गई
मंच से मै तुम्हे गुनगुनाता रहा

एक खामोश हलचल बनी ज़िन्दगी
गहरा ठहरा हुआ जल बनी ज़िन्दगी
तुम बिना जैसे महलों मे बीता हुआ
उर्मिला का कोई पल बनी ज़िन्दगी
दृष्टि आकाश मे आस का एक दिया
तुम बुझाती रही, मै जलाता रहा
तुम गज़ल बन गई, गीत में ढल गई
मंच से मै तुम्हे गुनगुनाता रहा

तुम चली तो गई मन अकेला हुआ
सारी यादों का पुरजोर मेला हुआ
जब भी लौटी नई खुशबूऒं मे सजी
मन भी बेला हुआ तन भी बेला हुआ
खुद के आघात पर व्यर्थ की बात पर
रूठती तुम रही मै मनाता रहा
तुम गज़ल बन गई, गीत में ढल गई
मंच से मै तुम्हे गुनगुनाता रहा

मै तुम्हे ढूंढने स्वर्ग के द्वार तक
रोज़ जाता रहा , रोज़ आता रहा

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बादडियो गगरिया भर दे
बादडियो गगरिया भर दे
प्यासे तन-मन-जीवन को
इस बार तू तर कर दे
बादडियो गगरिया भर दे

अंबर से अमृत बरसे
तू बैठ महल मे तरसे
प्यासा ही मर जाएगा
बाहर तो आजा घर से
इस बार समन्दर अपना
बूँदों के हवाले कर दे
बादडियो गगरिया भर दे

सबकी अरदास पता है
रब को सब खास पता है
जो पानी मे घुल जाए
बस उसको प्यास पता है
बूँदों की लडी बिखरा दे
आँगन मे उजाले कर दे..!!

कोई दीवाना कहता है..!!



कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है !
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !!
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है !
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है !!

मोहब्बत एक एहसासों की पावन सी कहानी है !
कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है !!
यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं !
जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है !!


समंदर पीर का अन्दर है, लेकिन रो नही सकता !
यह आँसू प्यार का मोती है, इसको खो नही सकता !!
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना, मगर सुन ले !
जो मेरा हो नही पाया, वो तेरा हो नही सकता !!


भ्रमर कोई कुमुदुनी पर मचल बैठा तो हंगामा!
हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा!!
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का!
मैं किस्से को हकीक़त में बदल बैठा तो हंगामा!!

बहुत टूटा बहुत बिखरा थपेडे सह नही पाया
हवाऒं के इशारों पर मगर मै बह नही पाया
रहा है अनसुना और अनकहा ही प्यार का किस्सा
कभी तुम सुन नही पायी कभी मै कह नही पाया

बस्ती बस्ती घोर उदासी पर्वत पर्वत खालीपन
मन हीरा बेमोल बिक गया घिस घिस रीता तन चंदन
इस धरती से उस अम्बर तक दो ही चीज़ गज़ब की है
एक तो तेरा भोलापन है एक मेरा दीवानापन

तुम्हारे पास हूँ लेकिन जो दूरी है समझता हूँ
तुम्हारे बिन मेरी हस्ती अधूरी है समझता हूँ
तुम्हे मै भूल जाऊँगा ये मुमकिन है नही लेकिन
तुम्ही को भूलना सबसे ज़रूरी है समझता हूँ

पनाहों में जो आया हो तो उस पर वार करना क्या
जो दिल हारा हुआ हो उस पर फिर अधिकार करना क्या
मुहब्बत का मज़ा तो डूबने की कश्मकश मे है
हो गर मालूम गहराई तो दरिया पार करना क्या

समन्दर पीर का अन्दर है लेकिन रो नही सकता
ये आँसू प्यार का मोती है इसको खो नही सकता
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना मगर सुन ले
जो मेरा हो नही पाया वो तेरा हो नही सकता..!!