"देवेंद्र का ब्लॉग"
"वक्त बड़ा आजीब होता है इसके साथ चलो तो किस्मत बदल देता है, न चलो तो किस्मत को ही बदल देता है..!!
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Monday, 3 June 2024
दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे..!!
दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे,
जब कभी हम दोस्त हो जायें तो शर्मिंदा न हों।|
कोई हाथ भी न मिलाएगा, जो गले मिलोगे तपाक से..!!
कोई हाथ भी न मिलाएगा, जो गले मिलोगे तपाक से,
ये नए मिजाज का शहर है, जरा फ़ासले से मिला करो।|
Sunday, 4 July 2021
लोग टूट जाते हैं, एक घर बनाने में..!!
लोग टूट जाते हैं, एक घर बनाने में
तुम तरस नहीं खाते, बस्तियाँ जलाने में
और जाम टूटेंगे, इस शराबख़ाने में
मौसमों के आने में, मौसमों के जाने में
हर धड़कते पत्थर को, लोग दिल समझते हैं
उम्र बीत जाती है, दिल को दिल बनाने में
फ़ाख़्ता की मजबूरी ,ये भी कह नहीं सकती
कौन साँप रखता है, उसके आशियाने में
दूसरी कोई लड़की, ज़िंदगी में आएगी
कितनी देर लगती है, उसको भूल जाने में..!!
Sunday, 28 September 2014
लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में..!!
लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में,
तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में।
हर धड़कते पत्थर को, लोग दिल समझते हैं
उम्र बीत जाती है, दिल को दिल बनाने में।
कोई हाथ भी न मिलाएगा, जो गले मिलोगे तपाक से,
ये नए मिजाज का शहर है, जरा फ़ासले से मिला करो।
सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जायेगा,
इतना मत चाहो उसे वो बे-वफ़ा हो जायेगा।
हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है,
जिस तरफ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जायेगा।
तमाम रिश्तों को मैं घर पे छोड़ आया था,
फिर उस के बाद मुझे कोई अजनबी नहीं मिला।
मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला
अगर गले नहीं मिलता, तो हाथ भी न मिला।
पलकें भी चमक जाती हैं सोते में हमारी,
आंखों को अभी ख्वाब छुपाने नहीं आते।
परखना मत, परखने में कोई अपना नहीं रहता
किसी भी आईने में देर तक चेहरा नहीं रहता
उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो,
न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए..!!
Tuesday, 23 September 2014
मुझसे बिछड़ के खुश रहते हो..!!
मुझसे बिछड़ के खुश रहते हो,
मेरी तरह तुम भी झूठे हो,
इक टहनी पर चाँद टिका था,
मैं ये समझा तुम बैठे हो,
उजले उजले फूल खिले थे,
बिल्कुल जैसे तुम हँसते हो,
मुझको शाम बता देती है,
तुम कैसे कपड़े पहने हो,
तुम तन्हा दुनिया से लडोगे,
बच्चों सी बातें करते हो,
खुदा हमको ऐसी खुदाई ना दे..!!
खुदा हमको ऐसी खुदाई ना दे
के अपने सिवा कुछ दिखाई ना दे
खतावार समझेगी दुनिया तुझे
के इतनी ज़ियादा सफाई ना दे
हंसो आज इतना के इस शोर में
सदा सिसकियों की सुनाई ना दे
अभी तो बदन में लहू है बहुत
कलम छीन ले रोशनाई ना दे
खुदा ऐसे एहसास का नाम है
रहे सामने और दिखायी ना दे
कौन आया रास्ते आइना खाना हो गए..!!
कौन आया रास्ते आइना खाना हो गए
रात रोशन हो गयी दिन भी सुहाने हो गए
ये भी मुमकिन है कि उसने मुझको पहचाना ना हो
अब उसे देखे हुए कितने जमाने हो गए
जाओ उन कमरों के आईने उठाकर फ़ेंक दो
वे अगर ये कह रहे हों हम पुराने हो गए
मेरी पलकों पर ये आंसू प्यार की तौहीन हैं
उसकी आँखों से गिरे मोती के दाने हो गए..!!
Thursday, 6 June 2013
परखना मत, परखने में कोई अपना नहीं रहता
किसी भी आईने में देर तक चेहरा नहीं रहता
बड़े लोगों से मिलने में में हमेशा फासला रखना
जहां दरिया समंदर में मिला, दरिया नहीं रहता
तुम्हारा शहर तो बिलकुल नए अंदाज़ वाला है
हमारे शहर में भी अब कोई हमसा नहीं रहता
मोहब्बत एक खुशबू है, हमेशा साथ रहती है
कोई इंसान तन्हाई में भी तन्हा नहीं रहता ..!!
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