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तुम्ही मिटाओ मेरी उलझन कैसे कहूँ कि तुम कैसी हो कोई नहीं सृष्टि में तुम-सा माँ तुम बिलकुल माँ जैसी हो। ब्रह्मा तो केवल रचता है तुम तो पालन भी करती हो शिव हरते तो सब हर लेते तुम चुन-चुन पीड़ा हरती हो किसे सामने खड़ा करूँ मैं और कहूँ फिर तुम ऐसी हो। माँ तुम बिलकुल माँ जैसी हो।। ज्ञानी बुद्ध प्रेम बिना सूखे सारे देव भक्ति के भूखे लगते हैं तेरी तुलना में ममता बिन सब रुखे-रुखे पूजा करे सताए कोई सब के लिए एक जैसी हो। माँ तुम बिलकुल माँ जैसी हो।। कितनी गहरी है अदभुत-सी तेरी यह करुणा की गागर जाने क्यों छोटा लगता है तेरे आगे करुणा-सागर जाकी रही भावना जैसी मूरत देखी तिन्ह तैसी हो। माँ तुम बिलकुल माँ जैसै हो।। मेरी लघु आकुलता से ही कितनी व्याकुल हो जाती हो मुझे तृप्त करने के सुख में तुम भूखी ही सो जाती हो। सब जग बदला मैं भी बदला तुम तो वैसी की वैसी हो। माँ तुम बिलकुल माँ जैसी हो।। तुम से तन मन जीवन पाया तुमने ही चलना सिखलाया पर देखो मेरी कृतघ्नता काम तुम्हारे कभी न आया क्यों करती हो क्षमा हमेशा तुम भी तो जाने कैसी हो। माँ तुम बिलकुल माँ जैसी हो।। -शास्त्री नित्यगोपाल कटारे |
"वक्त बड़ा आजीब होता है इसके साथ चलो तो किस्मत बदल देता है, न चलो तो किस्मत को ही बदल देता है..!!
Tuesday, 3 January 2012
तुम्हीं मिटाओ मेरी उलझन..!!
पैसे से आप यह सब नहीं खरीद सकते..!!
“यदि आपके पास ऐसा कुछ नहीं है जिसे पैसे से नहीं खरीदा जा सकता तो आप धनी नहीं हैं” – गार्थ ब्रुक
१ – प्यार की पहली छुअन – इसके बारे में क्या कहूँ:)
२ – सच्चे प्यार का अहसास – यह अहसास कि आपने सही व्यक्ति से विवाह किया:)
३ – सुन्दरता – क्योंकि सुन्दरता तो देखनेवाले की आंखों में होती है
४ – सच्ची दोस्ती – वे लम्हे जब दोस्त आपके साथ थे जब आपको उनकी ज़रूरत थी
५ – मानसिक शान्ति – जीवन में तृप्ति और संतोष के पल
६ – पहली बार कुछ नया करने जा रहे बच्चे (या बड़े) की आँखों की चमक
७ – किसी दिलचस्प वाक़ये को सुनाने का मज़ा
८ – खुशी – बहुत बड़ी चीज़
९ – सफलता – जिसे आप करना चाहते हैं उसी को करने का अवसर मिलना
१० – ज़िन्दगी का एक पल – जो एक बार जाता है तो कभी वापस नहीं आता
११ – बच्चे की किलकारियां
१२ – राह में अचानक बिछड़े हुए से मुलाकात
१३ – लक्ष्य को पाने अहसास
१४ – पहली बारिश में मिटटी से उठती सोंधी महक
१५ – बहुत अच्छा वार्तालाप – मुश्किल ही होता है
१६ – अप्रत्याशित बधाई – जिसकी या जिससे उम्मीद न की हो
१७ – अपने विचारों को साकार होते देखना
१८ – अचानक ही भूला-बिसरा गीत कानों में पड़ना
१९ – रस्ते में फिसलकर संभलनेवाले का यह जताना जैसे कुछ हुआ ही न हो:)
२० – रिमझिम बारिश में सहसा सूरज का किरणें बिखेर देना
२१ – सही वक़्त पर सही जगह पर होना
२२ – किशोरावस्था का प्यार – जब दुनिया सहसा बदल जाती है
२३ – बचपन की यादें – जब दुनियादारी कोसों दूर थी
२४ – दोस्तों के साथ बैठकर बीते दिनों को याद करना
२५ – उमंग-उत्साह – अपने दिल के कहने पर चलना
२६ – घर के कबाड़ में पुराने फोटो और उपहार मिल जाना
२७ – बहुत दिनों बाद घर आने पर होने वाला अहसास
२८ – दूसरों से पहले किसी चुटकुले का मतलब समझ कर हंस देना
२९ – ख़ुद में कोई छुपा हुआ हुनर
३० – किसी के चेहरे पर मुस्कान लाना
३१ – भरे-पूरे परिवार के साथ बैठकर खाना खाना
३२ – अपने बिस्तर की गर्माहट
३३ – प्रकृति के साथ एकात्म का भाव
३४ – घर – पैसे से मकान खरीद सकते हैं, लेकिन उसे घर नहीं बना सकते because home is where the heart is
३५ – दिमाग का खुलापन
३६ – लोगों को बेवकूफियां करते देखना
३७ – प्रेमी के साथ सूरज को उगते और डूबते देखना
३८ – लहरों के मंथन का शोर
३९ – “I love you”
४० – जब किसी को आपका जन्मदिन याद रह जाए
४१ – उस खोयी हुई चीज़ का मिल जाना जिसके मिलने की आस टूट चुकी हो
४२ – कला के लिए प्रेरणा
४३ – प्यारे से अजनबी की आँखों से ऑंखें मिल जाना
४४ – जादू की झप्पी
४५ – बिना किसी की परवाह किए गाते रहना
४६ – सर्दी में मुंह से निकलने वाली भाप जिसे देखकर बच्चे खुशी से उछलते हैं
४७ – स्वीकार कर लिए जाने का अहसास
४८ – बादलों में आकृतियां देखना
४९ – नवजात को हाथों में उठाना
५० – यह यकीन कि आप किसी पर भरोसा कर सकते हैं
५१ – आग जलाकर उसके इर्द-गिर्द दोस्तों के साथ बैठना
५२ – दो बुजुर्गों को प्यार में डूबे देखना
५३ – चांदनी रात का नशीलापन
५४ – झील में पानी पर पत्थरों को उछालना
५५ – दूर कहीं बिजली चमकती देखना
५६ – यह जानना कि आप जब लौटेंगे तो वह वहीं मिलेगी
५७ – वसंत का आगमन
५८ – उसे सोते हुए देखना:)
५९ – यह जानना कि जो आप लिखते हैं उसे कोई पढता भी है
६० – कमेन्ट पाना
१ – प्यार की पहली छुअन – इसके बारे में क्या कहूँ:)
२ – सच्चे प्यार का अहसास – यह अहसास कि आपने सही व्यक्ति से विवाह किया:)
३ – सुन्दरता – क्योंकि सुन्दरता तो देखनेवाले की आंखों में होती है
४ – सच्ची दोस्ती – वे लम्हे जब दोस्त आपके साथ थे जब आपको उनकी ज़रूरत थी
५ – मानसिक शान्ति – जीवन में तृप्ति और संतोष के पल
६ – पहली बार कुछ नया करने जा रहे बच्चे (या बड़े) की आँखों की चमक
७ – किसी दिलचस्प वाक़ये को सुनाने का मज़ा
८ – खुशी – बहुत बड़ी चीज़
९ – सफलता – जिसे आप करना चाहते हैं उसी को करने का अवसर मिलना
१० – ज़िन्दगी का एक पल – जो एक बार जाता है तो कभी वापस नहीं आता
११ – बच्चे की किलकारियां
१२ – राह में अचानक बिछड़े हुए से मुलाकात
१३ – लक्ष्य को पाने अहसास
१४ – पहली बारिश में मिटटी से उठती सोंधी महक
१५ – बहुत अच्छा वार्तालाप – मुश्किल ही होता है
१६ – अप्रत्याशित बधाई – जिसकी या जिससे उम्मीद न की हो
१७ – अपने विचारों को साकार होते देखना
१८ – अचानक ही भूला-बिसरा गीत कानों में पड़ना
१९ – रस्ते में फिसलकर संभलनेवाले का यह जताना जैसे कुछ हुआ ही न हो:)
२० – रिमझिम बारिश में सहसा सूरज का किरणें बिखेर देना
२१ – सही वक़्त पर सही जगह पर होना
२२ – किशोरावस्था का प्यार – जब दुनिया सहसा बदल जाती है
२३ – बचपन की यादें – जब दुनियादारी कोसों दूर थी
२४ – दोस्तों के साथ बैठकर बीते दिनों को याद करना
२५ – उमंग-उत्साह – अपने दिल के कहने पर चलना
२६ – घर के कबाड़ में पुराने फोटो और उपहार मिल जाना
२७ – बहुत दिनों बाद घर आने पर होने वाला अहसास
२८ – दूसरों से पहले किसी चुटकुले का मतलब समझ कर हंस देना
२९ – ख़ुद में कोई छुपा हुआ हुनर
३० – किसी के चेहरे पर मुस्कान लाना
३१ – भरे-पूरे परिवार के साथ बैठकर खाना खाना
३२ – अपने बिस्तर की गर्माहट
३३ – प्रकृति के साथ एकात्म का भाव
३४ – घर – पैसे से मकान खरीद सकते हैं, लेकिन उसे घर नहीं बना सकते because home is where the heart is
३५ – दिमाग का खुलापन
३६ – लोगों को बेवकूफियां करते देखना
३७ – प्रेमी के साथ सूरज को उगते और डूबते देखना
३८ – लहरों के मंथन का शोर
३९ – “I love you”
४० – जब किसी को आपका जन्मदिन याद रह जाए
४१ – उस खोयी हुई चीज़ का मिल जाना जिसके मिलने की आस टूट चुकी हो
४२ – कला के लिए प्रेरणा
४३ – प्यारे से अजनबी की आँखों से ऑंखें मिल जाना
४४ – जादू की झप्पी
४५ – बिना किसी की परवाह किए गाते रहना
४६ – सर्दी में मुंह से निकलने वाली भाप जिसे देखकर बच्चे खुशी से उछलते हैं
४७ – स्वीकार कर लिए जाने का अहसास
४८ – बादलों में आकृतियां देखना
४९ – नवजात को हाथों में उठाना
५० – यह यकीन कि आप किसी पर भरोसा कर सकते हैं
५१ – आग जलाकर उसके इर्द-गिर्द दोस्तों के साथ बैठना
५२ – दो बुजुर्गों को प्यार में डूबे देखना
५३ – चांदनी रात का नशीलापन
५४ – झील में पानी पर पत्थरों को उछालना
५५ – दूर कहीं बिजली चमकती देखना
५६ – यह जानना कि आप जब लौटेंगे तो वह वहीं मिलेगी
५७ – वसंत का आगमन
५८ – उसे सोते हुए देखना:)
५९ – यह जानना कि जो आप लिखते हैं उसे कोई पढता भी है
६० – कमेन्ट पाना
पांच मिनट...!!
रेगिस्तान में एक आदमी के पास यमदूत आया लेकिन आदमी उसे पहचान नहीं सका और उसने उसे पानी पिलाया.
“मैं मृत्युलोक से तुम्हारे प्राण लेने आया हूँ” – यमदूत ने कहा – “लेकिन तुम अच्छे आदमी लगते हो इसलिए मैं तुम्हें पांच मिनट के लिए नियति की पुस्तक दे सकता हूँ. इतने समय में तुम जो कुछ बदलना चाहो, बदल सकते हो”.
यमदूत ने उसे नियति की पुस्तक दे दी. पुस्तक के पन्ने पलटते हुए आदमी को उसमें अपने पड़ोसियों के जीवन की झलकियाँ दिखीं. उनका खुशहाल जीवन देखकर वह ईर्ष्या और क्रोध से भर गया.
“ये लोग इतने अच्छे जीवन के हक़दार नहीं हैं” – उसने कहा, और कलम लेकर उनके भावी जीवन में भरपूर बिगाड़ कर दिया.
अंत में वह अपने जीवन के पन्नों तक भी पहुंचा. उसे अपनी मौत अगले ही पल आती दिखी. इससे पहले कि वह अपने जीवन में कोई फेरबदल कर पाता, मौत ने उसे अपने आगोश में ले लिया.
अपने जीवन के पन्नों तक पहुँचते-पहुँचते उसे मिले पांच मिनट पूरे हो चुके थे.
Tuesday, 29 November 2011
महगाई
रघुवीर अपने बीमार बच्चे के लिए फल खरीदने के लिए आया था। फलों के बढ़े हुए दाम सुनकर मन ही मन सोच रहा था, ‘क्या लूं और क्या न लूं? लूं भी कुछ या न लूं? लेना तो पड़ेगा थोड़ा बहुत शंकर के लिए। कितनी महंगाई हो गई है? फलों के दाम भी कहां से कहां पहुंच गए हैं?’
तभी एक अमीर महिला कार से उतरी। उसने बिना दाम पूछे एक किलो बढ़िया सेब और एक दर्ज़न बढ़िया केले खरीदे और पांच सौ रुपए का नोट निकालकर दुकानदार को पकड़ा दिया। दुकानदार ने चार सौ और कुछ रुपए उसे वापस कर दिए। रुपए वापस मिलते देख बरबस ही उस महिला के मुंह से निकला, ‘फ्रू ट तो सस्ते ही चल रहे हैं।’
यह सुनकर रघुवीर ने उस औरत की तरफ देखा। उसे लगा कि महंगाई नहीं बढ़ी है, सिर्फ उसी के पास रुपए नहीं है। जिसके पास रुपए हैं, उसके लिए कोई महंगाई नहीं है।
..वह वहीं खड़ा था और वह महिला जा चुकी थी।
Thursday, 6 October 2011
Saza Pe Chhod Diya, Jahaa Pe Chhod Diya..!!
Saza Pe Chhod Diya, Jahaa Pe Chhod Diya..
Her Ek Kam Ko hum Ne Khuda Pe Chhod Diya !!
Wo Hum Ko Yaad Rakhe Ya Phir Bhula De..
Usi Ka Kaam Tha, Us Ki Raza Pe Chhod Diya !!
Ab Us Ki Marzi Bhujha De, Ya Jala De..
Chirag Hum Ne Jala Ke Hawa Pe Chhod Diya !!
Aab Us Se Baat Kiye Bagair Kaise Rehenge Hum..
Ye Masla Dua Ka Tha So Dua Pe Chhod Diya !!
Is Liye To Wo Kehte Hain Dewana Hum Ko..
Ki Hum Ne Sara Zamana Wafa Pe Chhod Diya !!
Monday, 26 September 2011
MOHABBAT KI KASAM HUM, WAFA KAR RAHE HAIN..
MOHABBAT KI KASAM HUM, WAFA KAR RAHE HAIN UNKI NAZAR MEIN SHAYAD ,KHATA KAR RAHE HAIN RUTHE RUTHE SE HAIN WO MANAYEIN BHI TO KAISE KHABAR HI NAHIN KYUN RUTHE HAIN WO HUMSE MOHABBAT KI KASAM HUM, WAFA KAR RAHE HAIN UNKI NAZAR MEIN SHAYAD ,KHATA KAR RAHE HAIN PAL PAL MEIN EK PAL ISTARAH BHI AAYA UNKE HI FIKR MEIN JEE MERA GHABRAYA UNKE LIYE HAMESHA KHUDA SE,DUA KAR RAHE HAIN MOHABBAT KI KASAM HUM, WAFA KAR RAHE HAIN UNKI NAZAR MEIN SHAYAD ,KHATA KAR RAHE HAIN JAB BHI KABHI KAHIN UNSE MULAKAAT HUI HAAN SIRF SHIKWE SHIKAYATON KI BAAT HUI KHAMOKHAN KYUN WO HUMSE,GILA KAR RAHE HAIN MOHABBAT KI KASAM HUM, WAFA KAR RAHE HAIN UNKI NAZAR MEIN SHAYAD ,KHATA KAR RAHE HAIN DEKHTE HI WO HUMSE NAZREIN CHURATE HAIN MERE KAREEB AANE PAR DOOR CHALEJATE HAIN BE WAZAH WO MERE DIL PE,ZAFA KAR RAHE HAIN MOHABBAT KI KASAM HUM, WAFA KAR RAHE HAIN UNKI NAZAR MEIN SHAYAD ,KHATA KAR RAHE HAIN..!! ============================================ Aahat Aahat intezaar kar ke dekhna kabhi kissi say pyar kar ke dekhna Toot jatey hain khoon ke rishtay bhi Ghaltiyaan do-chaar kar ke dekhna Agar zindagi ka falsaffa samajhna ho barish me kachchi dewaar kharhi kr k dekhna Kaee janam beet jayein gay janaa kabhi meri mohabbatein shumaar kr k dekhna..!!
Saturday, 17 September 2011
सोने का शहर
रावण की सोने की लंका के बारे में तमाम कहानियां सुनी होगी, वहीं पूरी दुनिया में एक ऐसी मिथकीय जगह की तमाम कहानियां फैली हैं, जहां चारों आ॓र सोना ही सोना बिखरा है। इस जगह को नाम दिया गया है ‘अल डोराडो’ स्पेनी भाषा में सोने से बना या मढ़ा हुआ। सैकड़ों वर्षों से लोग इस जगह की खोज में लगे रहे हैं। कुछ ने तो अपनी पूरी जिंदगी इस जगह को खोजने में लगा दी। कहते हैं अल डोराडो की कथा उस कहानी से शुरू हुई जिसमें कहा गया था कि एक दक्षिण अमेरिकी कबीले का मुखिया स्वयं को सोने की धूल से लपेट लेता था, उसे देख ऐसा प्रतीत होता था मानो वे सोने का ही बना हो। १५३० के आसपास आज के कोलंबिया में स्पेनी आक्रमणकारी गोन्जालो जिमेनेज डे केसाडा ने १५३७ में म्युस्का (आज के कोलंबिया का कनडीनामार्का तथा बोयाका पहाड़ी क्षेत्र) में यहां की पुरानी परंपरा देखी। इसी परंपरा को देखने के बाद अल डोराडो (सुनहरा आदमी) अल इण्डियो डोराडो (दी गोल्डेन इंडियन), अल रे डोराडो (दी गोल्डेन किंग) आदि मिथक तेजी से सामने आये व अल डोराडो गोल्डेन किंग का राज्य था फिर शहर के रूप में जाना जाने लगा। इसी मशहूर सोने के शहर की तलाश में १५४१ में स्पेनी खोजी फ्रांसिस्को आ॓रीलाना तथा गोन्जालो पिजारे दक्षिण अमेरिका की आ॓र चल पड़े।
एक अन्य स्पेनी जुआन रोड्रिगे फ्रेयाइल ने एक लेख ‘अल कारनेरो’ में लिखा है कि म्युस्किा का मुख्य पादरी या सम्राट को एक धार्मिक अनुष्ठान के चलते सोने की धूल से पूरी तरह ढक दिया जाता था यानी उसके पूरे शरीर में सोने की धूल मल दी जाती थी व यह धार्मिक अनुष्ठान गुआटाविटा झील (आज के शहर बोगोटा के निकट) के पास हुआ था। 1636 में जुआन रोड्रिगे फ्रेयाइल ने अपने गवर्नर दोस्त डॉन जुआन को पत्र में लिखा ‘नये राजा के राज्याभिषेक के मौके पर यह अनुष्ठान हुआ। गद्दी पर बैठने से पहले राजा ने कुछ समय एकांत में गुफा में बिताया जहां उसके आसपास स्रियां भी नहीं थी, न उसको नमक का प्रयोग करना था न ही मिर्च आदि का न ही सूर्य की रोशनी में गुफा से बाहर आना था, पहले उसे विशाल गुआटाविटा झील तक ले जाया गया ताकि वे उस शैतान को भेट चढ़ा सके व बलि दे सके जिसे वह अपना देवता या भगवान मानते हैं। अनुष्ठान के दौरान सेवकों ने जलबेंत (सरपत) से नौका तैयार की, जिसे कीमती व सुंदर चीजों से सजाया गया। इसमें अंगीठी भी रखी गयी व इसमें खुशबूदार धूपबत्ती जला दी गयी। झील काफी बड़ी व गहरी थी व इसमें विशाल जहाज भी तैर सकता था। तट पर भी कई अंगीठियां जलायी गयी ताकि धुएं से दिन की रोशनी छुप जाये। इसके बाद राजा के कपड़े उतार उसके शरीर पर कोई चिपचिपा पदार्थ लगाया गया फिर शरीर पर सोने का चूर्ण लगाया गया जिससे राजा का पूरा शरीर ढक गया। इसके उपरान्त राजा को नाव में बिठाया गया व राजा के पावों के पास सोने व पन्नों के ढेर रखे गये ताकि वह इन्हें अपने देवता को चढ़ा सके। राजा के साथ नाव में उसके चार प्रमुख मंत्री भी थे जो परो, मुकुट, कड़ों व हारों से लदे थे। यह सभी आभूषण सोने के बने थे। यह चारों भी नग्न थे व जैसे ही नाव झील के बीच में पहुंची सभी ने स्वर्ण को झील में फेंक दिया। फिर नाव तट तक आयी और ढोल, नगाड़े बजने लगे व इसी के साथ इन लोगों को नया राजा मिल गया।
ऐसा माना जाता है कि म्यूसिका में झील के आसपास कई कबीले ऐसे अनुष्ठान करते होंगे। म्यूसिका व इसके जैसे अन्य शहरों व प्रांतों के बारे में जब स्पेनी आक्रमणकारियों ने सुना तो वे हजारों मील की समुद्री यात्रा कर यहां आ धमके। यहां उन्हें राजा व अन्य रईसों के पास से काफी सोना वगैरह तो मिला पर न उन्हें सोने से बने ऐसे शहर दिखे जहां मकान ही सोने से बने हों न ही ऐसी सोने की खदानें जहां सोना भरा हो, क्योंकि इन प्रांतों में सोना व्यापार से कमाया गया था। इसके बाद स्पेनियों का विश्वास अल डोराडो पर एक बार फिर से जम गया क्योंकि अल डोराडो की कहानियां उन लोगों से सुनने लगे, जिन्हें इन्होंने बंदी बनाया था। 1580 के आसपास तो स्पेनियों ने सोना पाने की चाह में पूरी झील का पानी पहाड़ी को काटकर दूसरी आ॓र निकाल देने की भी सोची। इस प्रयास के चक्कर में पहाड़ी का काटा गया हिस्सा आज भी देखा जा सकता है। जल्द ही अल डोराडो के मिथक में तमाम अन्य किस्से भी जुड़े व कई सौ वर्षों तक लोग यह मानते रहे कि एक ऐसा शहर है, जहां हजारों हजार टन सोना है। अल डोराडो की खोज में सबसे प्रसिद्ध नाम है, फ्रांसिस्को डी आ॓रीलाना तथा गोन्जालो पिजारो (1541) का जो सोने के लालच में दक्षिण अमेरिका आए। अन्य मशहूर लोग जो सोना पाने की चाह में यहां पहुंचे वे थे फिलिप वॉन हट्टन (1541-45) जो वेनेजुएला पहुंचा तथा गोन्जालो जिमेनेज डी केसाडा जो 1549 में आया। सर वाल्टर रेले, जिन्होंने 1595 में पुन: खोज शुरू की, ने अल डोराडो को ऐसा शहर बताया है जो गुईआना में आ॓रीनोको तक फैला था। इस शहर को अंग्रेजों द्वारा बनाये नक्शों में भी दिखाया जाने लगा। बाद में इन्हें मिथकीय मानकर इनका नामोनिशान नक्शे से मिटा दिया गया। हद तो यह है कि एक सैनिक ने यह बात तक उड़ा दी कि 1531 में जहाज के डूबने के बाद उसे अलडोराडो नाम के शहर के लोगों ने ही बचाया और इस शहर में रखा भी।
आज अल डोराडो उस शहर को कह देते हैं जहां पर काफी सम्पन्नता है। मशहूर कवि मिल्टन ने ‘पेराडाइज लास्ट’ में इसका जिक्र किया है। आज ‘होली ग्रेल’ (जीसस का पवित्र प्याला), पारस पत्थर आदि की तरह अल डोराडो भी किस्सों का हिस्सा भर रह गया है क्योंकि लाखों प्रयास के बाद भी ऐसा कोई शहर नहीं मिलता जहां चारों आ॓र हर चीज सोने की बनी हो।
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