Sunday, 2 April 2017

सूरज ढला तो कद से ऊँचे हो गए साये..!!

सूरज ढला तो कद से ऊँचे हो गए साये,

कभी पैरों से रौंदी थी, यहीं परछाइयां हमने..!!

बस ज़ायके में थोड़ा कड़वा है..!!


बस ज़ायके में थोड़ा कड़वा है

वरना सच का कोई ज़वाब नहीं..!!

Friday, 10 March 2017

इज़हार-ए-इश्क करो उस से..!!


इज़हार-ए-इश्क करो उस से, जो हक़दार हो इसका,

बड़ी नायाब शय है ये, इसे ज़ाया नहीं करते..!!

हमको टालने का शायद तुमको..!!


हमको टालने का शायद तुमको सलीका आ गया,

बात तो करते हो लेकिन अब तुम अपने नहीं लगते..!!

Saturday, 25 February 2017

वक्त के पंजे से बचकर कोई कहाँ गया है..!!

वक्त के पंजे से बचकर कोई कहाँ गया है,

मिटटी से पूछिये सिकंदर कहाँ गया है..!!

नामाबर अपना हवाओं को बनाने वाले.!!

नामाबर अपना हवाओं को बनाने वाले
अब न आएँगे पलट कर कभी जाने वाले,

क्या मिलेगा तुझे बिखरे हुए ख़्वाबों के सिवा
रेत पर चाँद की तसवीर बनाने वाले..!!

बरसों से कायम है इश्क अपने उसूलो पर..!!

बरसों से कायम है इश्क अपने उसूलो पर,

ये कल भी तकलीफ देता था और ये आज भी तकलीफ देता है..!!