मोहब्बत आजमानी हो तो बस इतना ही काफी है,
जरा सा रुठकर देखो मनाने कौन आता है..!!
"वक्त बड़ा आजीब होता है इसके साथ चलो तो किस्मत बदल देता है, न चलो तो किस्मत को ही बदल देता है..!!
ना जाने क्यूँ गले से लिपट कर रोने लगा जब हम बरसों बाद मिले,
जाते हुये जिस ने कहा था.. कि तुम जैसे लाखों मिलेंगे..!!
भरोसा मत करो साँसों की डोरी टूट जाती है
छतें महफ़ूज़ रहती हैं हवेली टूट जाती है,
मुहब्बत भी अजब शय है वो जब परदेस में रोये
तो फ़ौरन हाथ की एक - आध चूड़ी टूट जाती है,
कहीं कोई कलाई एक चूड़ी को तरसती है
कहीं कंगन के झटके से कलाई टूट जाती है,
लड़कपन में किये वादे की क़ीमत कुछ नहीं होती
अँगूठी हाथ में रहती है मँगनी टूट जाती है,
किसी दिन प्यास के बारे में उससे पूछिये जिसकी
कुएँ में बाल्टी रहती है रस्सी टूट जाती है,
कभी एक गर्म आँसू काट देता है चटानों को
कभी एक मोम के टुकड़े से छैनी टूट जाती है..!!
नामाबर अपना हवाओं को बनाने वाले
अब न आएँगे पलट कर कभी जाने वाले,
क्या मिलेगा तुझे बिखरे हुए ख़्वाबों के सिवा
रेत पर चाँद की तसवीर बनाने वाले,
मैक़दे बन्द हुए ढूँढ रहा हूँ तुझको
तू कहाँ है मुझे आँखों से पिलाने वाले,
काश ले जाते कभी माँग के आँखें मेरी
ये मुसव्विर तेरी तसवीर बनाने वाले,
तू इस अन्दाज़ में कुछ और हसीं लगता है
मुझसे मुँह फेर के ग़ज़लें मेरी गाने वाले,
सबने पहना था बड़े शौक़ से काग़ज़ का लिबास
जिस क़दर लोग थे बारिश में नहाने वाले,
छत बना देते हैं अब रेत की दीवारों पर
कितने ग़ाफ़िल हैं नये शहर बसाने वाले,
अद्ल की तुम न हमें आस दिलाओ कि यहाँ
क़त्ल हो जाते है ज़जीर हिलाने वाले,
किसको होगी यहाँ तौफ़ीक़-ए-अना मेरे बाद
कुछ तो सोचें मुझे सूली पे चढ़ाने वाले,
मर गये हम तो ये क़त्बे पे लिखा जाएगा
सो गये आप ज़माने को जगाने वाले,
दर-ओ-दीवार पे हसरत-सी बरसती है क़तील
जाने किस देस गये प्यार निभाने वाले..!!