Tuesday, 12 May 2020

किसी रोज़ याद न कर पाऊँ तो खुदग़रज़ ना समझलेना दोस्तों..!!

किसी रोज़ याद न कर पाऊँ तो खुदग़रज़ ना समझ
लेना दोस्तों...

दरअसल छोटी सी इस उम्र मैं परेशानियां बहुत
हैं...!!
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न कहा करो हर बार की हम छोड़ देंगे तुमको,
न हम इतने आम हैं, न ये तेरे बस की बात है…!! 

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वफ़ा का नाम सुना था पुराने लोगो से....
हमारे दौर में शायद ये हादसा हुआ नही करता..!!

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चंद रुपयों मैं बिकता हैं यहाँ “इंसान का ज़मीर” कौन कहता हैं मेरे देश मैं महंगाई बहुत हैं..!!

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मैखाने मे आऊंगा मगर पिऊंगा नही साकी;
ये शराब मेरा गम मिटाने की औकात नही रखती..!!

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तुम लौट के आने का तकल्लुफ मत करना;
हम एक मोहब्बत को दो बार नहीं करते..!!

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मोहब्बत-मोहब्बत की बस इतनी कहानी है;
इक टूटी हुई कश्ती और ठहरा हुआ पानी है;
इक फूल जो किताबों में कहीं दम तोड़ चुका है;
कुछ याद नहीं आता किसकी निशानी है..!!

Wednesday, 29 April 2020

कितना दुश्वार है दुनिया ये हुनर आना भी..!!

कितना दुश्वार है दुनिया ये हुनर आना भी
तुझी से फ़ासला रखना तुझे अपनाना भी

ऐसे रिश्ते का भरम रखना बहुत मुश्किल है
तेरा होना भी नहीं और तेरा कहलाना भी||

उसूलों पे जहाँ आँच आये टकराना ज़रूरी है..!!

उसूलों पे जहाँ आँच आये टकराना ज़रूरी है
जो ज़िन्दा हों तो फिर ज़िन्दा नज़र आना ज़रूरी है

नई उम्रों की ख़ुदमुख़्तारियों को कौन समझाये
कहाँ से बच के चलना है कहाँ जाना ज़रूरी है

थके हारे परिन्दे जब बसेरे के लिये लौटें
सलीक़ामन्द शाख़ों का लचक जाना ज़रूरी है

बहुत बेबाक आँखों में त'अल्लुक़ टिक नहीं पाता
मुहब्बत में कशिश रखने को शर्माना ज़रूरी है

सलीक़ा ही नहीं शायद उसे महसूस करने का
जो कहता है ख़ुदा है तो नज़र आना ज़रूरी है

मेरे होंठों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो
कि इस के बाद भी दुनिया में कुछ पाना ज़रूरी है||

Monday, 27 April 2020

जिद में आकर उनसे ताल्लुक तोड़..!!

जिद में आकर उनसे ताल्लुक तोड़ लिया हमने,
अब सुकून उनको नहीं और बेकरार हम भी हैं।

किसी को तलाशते तलाशते खुद को खो देना,
आंसा है क्या आशिक हो जाना..!!

जो बीत गई सो बात गई..!!

जो बीत गई सो बात गई

जीवन में एक सितारा था
माना वह बेहद प्यारा था
वह डूब गया तो डूब गया
अम्बर के आनन को देखो
कितने इसके तारे टूटे
कितने इसके प्यारे छूटे
जो छूट गए फिर कहाँ मिले
पर बोलो टूटे तारों पर
कब अम्बर शोक मनाता है
जो बीत गई सो बात गई

जीवन में वह था एक कुसुम
थे उसपर नित्य निछावर तुम
वह सूख गया तो सूख गया
मधुवन की छाती को देखो
सूखी कितनी इसकी कलियाँ
मुर्झाई कितनी वल्लरियाँ
जो मुर्झाई फिर कहाँ खिली
पर बोलो सूखे फूलों पर
कब मधुवन शोर मचाता है
जो बीत गई सो बात गई

जीवन में मधु का प्याला था
तुमने तन मन दे डाला था
वह टूट गया तो टूट गया
मदिरालय का आँगन देखो
कितने प्याले हिल जाते हैं
गिर मिट्टी में मिल जाते हैं
जो गिरते हैं कब उठतें हैं
पर बोलो टूटे प्यालों पर
कब मदिरालय पछताता है
जो बीत गई सो बात गई

मृदु मिटटी के हैं बने हुए
मधु घट फूटा ही करते हैं
लघु जीवन लेकर आए हैं
प्याले टूटा ही करते हैं
फिर भी मदिरालय के अन्दर 
मधु के घट हैं मधु प्याले हैं
जो मादकता के मारे हैं
वे मधु लूटा ही करते हैं
वह कच्चा पीने वाला है
जिसकी ममता घट प्यालों पर
जो सच्चे मधु से जला हुआ
कब रोता है चिल्लाता है
जो बीत गई सो बात गई..!!

Monday, 31 December 2018

आज बड़ी देर तक वो मुझे देखता रहा..!!


आज बड़ी देर तक वो मुझे देखता रहा,

ना जाने क्यों लगा कि वो मुझे छोड़ जाऐगा..!!

वो बेवफा नहीं था युहीं बदनाम हो गया..!!

वो बेवफा नहीं था युहीं बदनाम हो गया,

हजारों चाहने वाले थे किस किस से वफा करता..!!