Wednesday, 25 August 2021

आज हम उनको बेवफा बताकर आए है..!!

आज हम उनको बेवफा बताकर आए है
उनके खतो को पानी में बहाकर आए है 

कोई निकाल न ले उन्हें पानी से…
इस लिए पानी में भी आग लगा कर आए है..!!

Sunday, 4 July 2021

न मैं कंघी बनाता हूँ न मैं चोटी बनाता हूँ..!!

न मैं कंघी बनाता हूँ न मैं चोटी बनाता हूँ
ग़ज़ल में आपबीती को मैं जगबीती बनाता हूँ

ग़ज़ल वह सिन्फ़-ए-नाज़ुक़ है जिसे अपनी रफ़ाक़त से
वो महबूबा बना लेता है मैं बेटी बनाता हूँ

हुकूमत का हर एक इनआम है बंदूकसाज़ी पर
मुझे कैसे मिलेगा मैं तो बैसाखी बनाता हूँ

मेरे आँगन की कलियों को तमन्ना शाहज़ादों की
मगर मेरी मुसीबत है कि मैं बीड़ी बनाता हूँ

सज़ा कितनी बड़ी है गाँव से बाहर निकलने की
मैं मिट्टी गूँधता था अब डबल रोटी बनाता हूँ

वज़ारत चंद घंटों की महल मीनार से ऊँचा
मैं औरंगज़ेब हूँ अपने लिए खिचड़ी बनाता हूँ

बस इतनी इल्तिजा है तुम इसे गुजरात मत करना
तुम्हें इस मुल्क का मालिक मैं जीते-जी बनाता हूँ

मुझे इस शहर की सब लड़कियाँ आदाब करती हैं
मैं बच्चों की कलाई के लिए राखी बनाता हूँ

तुझे ऐ ज़िन्दगी अब क़ैदख़ाने से गुज़रना है
तुझे मैँ इस लिए दुख-दर्द का आदी बनाता हूँ

मैं अपने गाँव का मुखिया भी हूँ बच्चों का क़ातिल भी
जलाकर दूध कुछ लोगों की ख़ातिर घी बनाता हूँ..!!

लोग टूट जाते हैं, एक घर बनाने में..!!

लोग टूट जाते हैं, एक घर बनाने में
तुम तरस नहीं खाते, बस्तियाँ जलाने में

और जाम टूटेंगे, इस शराबख़ाने में
मौसमों के आने में, मौसमों के जाने में

हर धड़कते पत्थर को, लोग दिल समझते हैं
उम्र बीत जाती है, दिल को दिल बनाने में

फ़ाख़्ता की मजबूरी ,ये भी कह नहीं सकती
कौन साँप रखता है, उसके आशियाने में

दूसरी कोई लड़की, ज़िंदगी में आएगी
कितनी देर लगती है, उसको भूल जाने में..!!

Saturday, 12 June 2021

मांग लूँ यह मन्नत की फिर यही जहाँ मिले..!!

मांग लूँ यह मन्नत की फिर यही जहाँ 
मिले...
फिर वही गोद , 
फिर वही 'माँ' मिले..!!

हर बार ये इल्ज़ाम रह गया..!!

हर बार ये  इल्ज़ाम रह गया..!
हर काम में कोई  काम रह गया..!

नमाज़ी उठ उठ कर चले गये मस्ज़िदों से..!
दहशतगरों के हाथ में इस्लाम रह गया..!!

Sunday, 9 May 2021

तुम लौट के आने का तकल्लुफ मत करना..!!

तुम लौट के आने का तकल्लुफ मत करना,

हम एक मोहब्बत को दो बार नहीं करते..!!

जिसने हमको चाहा, उसे हम चाह न सके..!!

जिसने हमको चाहा, उसे हम चाह न सके,
जिसको चाहा उसे हम पा न सके,

यह समझ लो दिल टूटने का खेल है,
किसी का तोडा और अपना बचा न सके..!!