Thursday, 9 May 2013

ना ज़मीन, ना सितारे, ना चाँद, ना रात चाहिए..!!












ना ज़मीन, ना सितारे, ना चाँद, ना रात चाहिए,
दिल मे मेरे, बसने वाला किसी दोस्त का प्यार चाहिए,

ना दुआ, ना खुदा, ना हाथों मे कोई तलवार चाहिए,
मुसीबत मे किसी एक प्यारे साथी का हाथों मे हाथ चाहिए,

कहूँ ना मै कुछ, समझ जाए वो सब कुछ,
दिल मे उस के, अपने लिए ऐसे जज़्बात चाहिए,

उस दोस्त के चोट लगने पर हम भी दो आँसू बहाने का हक़ रखें,
और हमारे उन आँसुओं को पोंछने वाला उसी का रूमाल चाहिए,

मैं तो तैयार हूँ हर तूफान को तैर कर पार करने के लिए,
बस साहिल पर इन्तज़ार करता हुआ एक सच्चा दिलदार चाहिए,

उलझ सी जाती है ज़िन्दगी की किश्ती दुनिया की बीच मँझदार मे,
इस भँवर से पार उतारने के लिए किसी के नाम की पतवार चाहिए,

अकेले कोई भी सफर काटना मुश्किल हो जाता है,
मुझे भी इस लम्बे रास्ते पर एक अदद हमसफर चाहिए,

यूँ तो ‘मित्र’ का तमग़ा अपने नाम के साथ लगा कर घूमता हूँ,
पर कोई, जो कहे सच्चे मन से अपना दोस्त, ऐसा एक दोस्त चाहिए..!!

तेरा हँसना कमाल था साथी..!!















तेरा हँसना कमाल था साथी
हमको तुमपर मलाल था साथी

दाग चेहरे पे दे गया वो हमें
हमने समझा गुलाल था साथी

रात में आए तेरे ही सपने
दिन में तेरा ख्याल था साथी

उड़ गई नींद मेरी रातों की
तेरा कैसा सवाल था साथी

करने बैठे थे दिल का वो सौदा
कोई आया दलाल था साथी..!!

वो मेरा ही काम करेंगे..!!



















वो मेरा ही काम करेंगे
जब मुझको बदनाम करेंगे

अपने ऐब छुपाने को वो
मेरे क़िस्से आम करेंगे

क्यों अपने सर तोहमत लूं मैं
वो होगा जो राम करेंगे

दीवारों पर खून छिड़क कर
हाक़िम अपना नाम करेंगे

हैं जिनके किरदार अधूरे
दूने अपने दाम करेंगे

अपनी नींदें पूरी करके
मेरी नींद हराम करेंगे

जिस दिन मेरी प्यास मरेगी
मेरे हवाले जाम करेंगे

कल कर लेंगे कल कर लेंगे
यूँ हम उम्र तमाम करेंगे

सोच-सोच कर उम्र बिता दी
कोई अच्छा काम करेंगे

कोई अच्छा काम करेंगे
खुदको फिर बदनाम करेंगे !!

हम जैसे हैं वैसे ही हैं इन्कार नहीं हमको..!!
















कहने को तो कुछ भी कहो स्वीकार नहीं हमको
हम जैसे हैं वैसे ही हैं इन्कार नहीं हमको।

खामोश भी जब हम रहे कमजोर समझा हमको
तोडेंगे मौन अपना देंगे जवाब तुमको……
हम जैसे हैं वैसे ही हैं इन्कार नहीं हमको।

प्रश्नों के कटघरे में घेरा है तुमनें हमको
लेंगे हिसाब इक - इक देना पडेगा तुमको
हम जैसे हैं वैसे ही हैं इन्कार नहीं हमको।

पत्थर भी टूट जाए कोसा है इतना हमको
सभ्यता का पाठ फिर से पढना पडेग़ा तुमको
हम जैसे हैं वैसे ही हैं इन्कार नहीं हमको।

देखी नहीं जाती है सफलता हमारी तुमको
भारी पडी इक नारी दे दी शिकस्त तुमको
हम जैसे हैं वैसे ही हैं इन्कार नहीं हमको।

राज़ मुबारक तुमको ताज़ मुबारक तुमको
बस चाहते हैं इतना दे दो आकाश हमको
हम जैसे हैं वैसे ही हैं इन्कार नहीं हमको।

Wednesday, 8 May 2013

शक्ल हो बस आदमी का क्या यही पहचान है..!!
















शक्ल हो बस आदमी का क्या यही पहचान है।
ढूँढ़ता हूँ दर-ब-दर मिलता नहीं इन्सान है।।

घाव छोटा या बडा एहसास दर्द का एक है।
दर्द एक दूजे का बाँटें तो यही एहसान है।।

अपनी मस्ती राग अपना जी लिए तो क्या जीए।
जिंदगी, उनको जगाना हक से भी अनजान है।।

लूटकर खुशियाँ हमारी अब हँसी वे बेचते।
दीख रहा, वो व्यावसायिक झूठी सी मुस्कान है।।

हार के भी अब जितमोहन का हार की चाहत उन्हें।
ताज काँटों का न छूटे बस यही अरमान है।।

ज़िन्दगी बड़ी नागवार गुज़री है..!!















ज़िन्दगी बड़ी नागवार गुज़री है !
क़रार पा के ये, बेकरार गुज़री है !!

गमों की शाम भी आई थी तसल्ली देने !
करीब आके मेरे अश्क़बार गुज़री है !!

शम्मा की लौ में जलने की तमन्ना लेकर !
तड़प - तड़प के सहर बार बार गुज़री है !!

शज़र उदास है,मौसम भी है धुआं - धुआं !
नज़र चुरा के अबके बहार गुज़री है !!

मेरे क़ातिल मेरे मुंसिफ के इशारों पर !
रिहाई मुझसे अब दरकिनार गुज़री है !!

सुनो ऐसा नहीं करना..!!
















वफ़ा रुसवा नहीं करना
सुनो ऐसा नहीं करना

मैं पहले ही बहु अकेला हु
मुझे और तनहा नहीं करना

जुदाई भी अगर आये
दिल छोटा नहीं करना

बहु मश्रुफ हो जाना
मुझे सोचा नहीं करना

भरोसा भी जरुरी है
मगर साबका नहीं करना

मुकद्दर फिर मुकद्दर है
कभी दावा नहीं करना

जो लिखा है जरुर होगा
कभी शिकवा नहीं करना
मेरी गुजारिश तुमसे है
मुझे आधा नहीं करना

हकीकत है मिलान अपना
इसे सपना नहीं करना

हमे तुम याद रहते हो
हमे भूला नहीं करना..!!