Wednesday, 19 November 2014

जो उसने लिक्खे थे ख़त कापियों में छोड़ आए..!!

जो उसने लिक्खे थे ख़त कापियों में छोड़ आए
हम आज उसको बड़ी उलझनों में छोड़ आए,

अगर हरीफ़ों में हता तो बच भी सकता था
ग़लत किया जो उसे दोस्तों में छोड़ आए,

सफ़र का शौक़ भी कितना अजीब होता है
वो चेहरा भीगा हुआ आँसों में छोड़ आए,

फिर उसके बाद वो आँखें कभी नहीं रोयीं
हम उनको ऐसी ग़लतफ़हमियों में छोड़ आए,

महाज़-ए-जंग पे जाना बहुत ज़रूरी था
बिलखते बच्चे हम अपने घरों में छोड़ आए,

जब एक वाक़्या बचपन का हमको याद आया
हम उन परिन्दों को फिर घोंसलों में छोड़ आए..!!

ये दरवेशों कि बस्ती है यहाँ ऐसा नहीं होगा..!!

 ये दरवेशों कि बस्ती है यहाँ ऐसा नहीं होगा
लिबास ऐ ज़िन्दगी फट जाएगा मैला नहीं होगा,

शेयर बाज़ार में कीमत उछलती गिरती रहती है
मगर ये खून ऐ मुफलिस है महंगा नहीं होगा,

तेरे एहसान कि ईंटे लगी है इस इमारत में
हमारा घर तेरे घर से कभी उंचा नहीं होगा,

हमारी दोस्ती के बीच खुदगर्ज़ी भी शामिल है
ये बेमौसम का फल है ये बहुत मीठा नहीं होगा,

पुराने शहर के लोगों में एक रस्म ऐ मुर्रव्वत है
हमारे पास आ जाओ कभी धोखा नहीं होगा..!!

जब साफगोई को फैशन बना लिया मैंने..!!

 जब साफगोई को फैशन बना लिया मैंने
हर एक शख्स को दुशमन बना लिया मैंने,

हुई न पूरी जरूरत जब चार पैसों की
तो अपनी जेब को दामन बना लिया मैंने,

शबे-फिराक* शबे-वसल* में हुई तब्दील
खयाले-यार को दुल्हन बना लिया मैंने,

चमन में जब ना इज़ाज़त मिली रिहाइश की
तो बिज़लीयों में नशेमन बना लिया मैंने..!!

मोहब्बत में तुम्हे आंसू बहाना नहीं आया..!!

 मोहब्बत में तुम्हे आंसू बहाना नहीं आया,
बनारस में रहे और पान खाना नहीं आया !

न जाने लोग कैसे है मोम कर देते है पत्थर को,
हमें तो आप को भी गुदगुदाना नहीं आया!

शिकारी कुछ भी हो इतना सितम अच्छा नहीं होता,
अभी तो चोंच में चिड़िया के दाना तक नहीं आया..!!

ये कैसे रास्ते से लेके तुम मुझको चले आए,
कहा का मैकदा इक चायखाना तक नहीं आया !

मुहाजिर नामा..!!

मुहाजिर हैं मगर हम एक दुनिया छोड़ आए हैं,
तुम्हारे पास जितना है हम उतना छोड़ आए हैं ।

कहानी का ये हिस्सा आज तक सब से छुपाया है,
कि हम मिट्टी की ख़ातिर अपना सोना छोड़ आए हैं ।

नई दुनिया बसा लेने की इक कमज़ोर चाहत में,
पुराने घर की दहलीज़ों को सूना छोड़ आए हैं ।

अक़ीदत से कलाई पर जो इक बच्ची ने बाँधी थी,
वो राखी छोड़ आए हैं वो रिश्ता छोड़ आए हैं ।

जो इक पतली सड़क उन्नाव से मोहान जाती है,
वहीं हसरत के ख़्वाबों को भटकता छोड़ आए हैं ।

यक़ीं आता नहीं, लगता है कच्ची नींद में शायद,
हम अपना घर गली अपना मोहल्ला छोड़ आए हैं ।

हमारे लौट आने की दुआएँ करता रहता है,
हम अपनी छत पे जो चिड़ियों का जत्था छोड़ आए हैं ।

हमें हिजरत की इस अन्धी गुफ़ा में याद आता है,
अजन्ता छोड़ आए हैं एलोरा छोड़ आए हैं ।

सभी त्योहार मिलजुल कर मनाते थे वहाँ जब थे,
दिवाली छोड़ आए हैं दशहरा छोड़ आए हैं ।

हमें सूरज की किरनें इस लिए तक़लीफ़ देती हैं,
अवध की शाम काशी का सवेरा छोड़ आए हैं ।

गले मिलती हुई नदियाँ गले मिलते हुए मज़हब,
इलाहाबाद में कैसा नज़ारा छोड़ आए हैं ।

हम अपने साथ तस्वीरें तो ले आए हैं शादी की,
किसी शायर ने लिक्खा था जो सेहरा छोड़ आए हैं ।

कई आँखें अभी तक ये शिकायत करती रहती हैं,
के हम बहते हुए काजल का दरिया छोड़ आए हैं ।

ये हिजरत तो नहीं थी बुजदिली शायद हमारी थी,
के हम बिस्तर में एक हड्डी का ढाचा छोड़ आए हैं ।

महीनो तक तो अम्मी ख्वाब में भी बुदबुदाती थीं,
सुखाने के लिए छत पर पुदीना छोड़ आए हैं ।

वजारत भी हमारे वास्ते कम मर्तबा होगी,
हम अपनी माँ के हाथों में निवाला छोड़ आए हैं ।

यहाँ आते हुए हर कीमती सामान ले आए,
मगर इकबाल का लिखा तराना छोड़ आए हैं ।

हिमालय से निकलती हर नदी आवाज़ देती थी,
मियां आओ वजू कर लो ये जूमला छोड़ आए हैं ।

वजू करने को जब भी बैठते हैं याद आता है,
के हम जल्दी में जमुना का किनारा छोड़ आए हैं ।

उतार आये मुरव्वत और रवादारी का हर चोला,
जो एक साधू ने पहनाई थी माला छोड़ आए हैं ।

जनाबे मीर का दीवान तो हम साथ ले आये,
मगर हम मीर के माथे का कश्का छोड़ आए हैं ।

उधर का कोई मिल जाए इधर तो हम यही पूछें,
हम आँखे छोड़ आये हैं के चश्मा छोड़ आए हैं ।

हमारी रिश्तेदारी तो नहीं थी हाँ ताल्लुक था,
जो लक्ष्मी छोड़ आये हैं जो दुर्गा छोड़ आए हैं ।

गले मिलती हुई नदियाँ गले मिलते हुए मज़हब,
इलाहाबाद में कैसा नाज़ारा छोड़ आए हैं ।

कल एक अमरुद वाले से ये कहना गया हमको,
जहां से आये हैं हम इसकी बगिया छोड़ आए हैं ।

वो हैरत से हमे तकता रहा कुछ देर फिर बोला,
वो संगम का इलाका छुट गया या छोड़ आए हैं।

अभी हम सोच में गूम थे के उससे क्या कहा जाए,
हमारे आन्सुयों ने राज खोला छोड़ आए हैं ।

मुहर्रम में हमारा लखनऊ इरान लगता था,
मदद मौला हुसैनाबाद रोता छोड़ आए हैं ।

जो एक पतली सड़क उन्नाव से मोहान जाती है,
वहीँ हसरत के ख्वाबों को भटकता छोड़ आए हैं ।

महल से दूर बरगद के तलए मवान के खातिर,
थके हारे हुए गौतम को बैठा छोड़ आए हैं ।

तसल्ली को कोई कागज़ भी चिपका नहीं पाए,
चरागे दिल का शीशा यूँ ही चटखा छोड़ आए हैं ।

सड़क भी शेरशाही आ गयी तकसीम के जद मैं,
तुझे करके हिन्दुस्तान छोटा छोड़ आए हैं ।

हसीं आती है अपनी अदाकारी पर खुद हमको,
बने फिरते हैं युसूफ और जुलेखा छोड़ आए हैं ।

गुजरते वक़्त बाज़ारों में अब भी याद आता है,
किसी को उसके कमरे में संवरता छोड़ आए हैं ।

हमारा रास्ता तकते हुए पथरा गयी होंगी,
वो आँखे जिनको हम खिड़की पे रखा छोड़ आए हैं ।

तू हमसे चाँद इतनी बेरुखी से बात करता है
हम अपनी झील में एक चाँद उतरा छोड़ आए हैं ।

ये दो कमरों का घर और ये सुलगती जिंदगी अपनी,
वहां इतना बड़ा नौकर का कमरा छोड़ आए हैं ।

हमे मरने से पहले सबको ये ताकीत करना है ,
किसी को मत बता देना की क्या-क्या छोड़ आए हैं ।

थकन को ओढ़ कर बिस्तर में जाके लेट गए..!!

 थकन को ओढ़ कर बिस्तर में जाके लेट गए
हम अपनी कब्र -ऐ -मुक़र्रर में जाके लेट गए,

तमाम उम्र हम एक दुसरे से लड़ते रहे
मगर मरे तो बराबर में जाके लेट गए,

हमारी तश्ना नसीबी का हाल मत पुछो
वो प्यास थी के समुन्दर में जाके लेट गए,

न जाने कैसी थकन थी कभी नहीं उतरी
चले जो घर से तो दफ्तर में जाके लेट गए,

ये बेवक़ूफ़ उन्हे मौत से डराते हैं
जो खुद ही साया -ऐ -खंजर में जाके लेट गए,

तमाम उम्र जो निकले न थे हवेली से
वो एक गुम्बद -ऐ -बेदर में जाके लेट गए,

सजाये फिरते थे झूठी अना को चेहरे पर
वो लोग कसर -ऐ -सिकंदर में जाके लेट गए..!!

एक करोड़ का सवाल..!!

टीवी कार्यक्रम ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में एक करोड़ के अंतिम सवाल पर मुस्कुराते हुए बिग बी ने प्रतियोगी से कहा- ‘आप बहुत भाग्यशाली हैं, इस सीट पर बैठ कर एक करोड़ के सवाल का जवाब देने वाले आप पहले व्यक्ति हैं। जवाब आपको सोच समझ कर देना है। इसका जवाब सही देने पर आपको मिलेंगे एक करोड़ रुपये, प्रसिद्धि, सम्मान और गलत जवाब देने पर आप निराश हो कर लौटेंगे, क्योंकि आपने पचास लाख कमाने का भी अवसर खो दिया है। उन्होंने प्रतियोगी की तरफ व्यंग्यपपूर्ण मुस्कान बिखेरी।

प्रतियोगी ने कहा-‘जी।
‘कैसा लग रहा है आपको।' बिग बी ने पूछा।
जवाब मिला- बहुत रोमांचित हूँ।‘
मैं भी ।‘ बिग बी ने कहा। मैं भी देखना चाहता हूँ कि कौनसा सवाल है, एक करोड़ का। मुझे भी नहीं मालूम, विश्वास कीजिये मुझे भी नहीं मालूम।'

सभी हँसने लगे। कुर्सी सँभालते हुए बिग बी ने कार्यक्रम आगे बढ़ाया। वे बोले- ’तो आप तैयार हैं, एक करोड़ के सवाल को सुनने, पढ़ने और अपना भाग्य आजमाने के लिए?’
’हाँ।' प्रतियोगी ने भी मुसकुराकर कहा।
बिग बी ने हाथ मसलते हुए कहा- ‘तो लीजिये, आपका एक करोड़ का सवाल।' उन्होंने सवाल पहले अँग्रेजी में पढ़ा और फिर उसे हिदी में दोहराया ‘आज देश में बढ़ते असंतोष, भ्रष्टाड़चार, महँगाई और अनेक समस्याओं के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेमदार कौन है? और कहा- ‘जल्दबाजी नहीं, आपके पास बहुत समय है, सही जवाब आपको करोड़पति बना देगा और ग़लत जवाब आपको----आप--- समझते –ही-- हैं।'
प्रतियोगी बहुत देर तक सोचता रहा। बिग बी ने कहा- ‘आपके पास सारी सुविधाएँ भी खत्म हो गयी हैं। आप किसी से पूछ भी नहीं सकते। अब आपको ही निर्णय लेना है कि ए- जनता, बी- नेता, सी- सरकार और डी- पुलिस, इसमें से कौन-सा विकल्प चुनना है।'

थोड़े से सन्नाटे के बाद, प्रतियो‍गी ने कहा- ‘सरकार।' बिग बी ने कहा- ‘सी, सरकार।‘
"आप पूरी तरह से आश्वस्त हैं? जल्दमबाजी नहीं करें। सोचें, कि इसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार कौन है, जनता, नेता, सरकार या पुलिस। एक बार जवाब ताला लग गया, तो आपके सारे रास्तेज बंद, फि‍र मैं भी कुछ नहीं कर पाउँगा।'
’जी। मैं जानता हूँ, मेरा जवाब है ‘सी’ सरकार’।' प्रतियोगी ने कहा।

’तो आपको पूरा विश्वास हैं, सी, स—र—का—र।' बिग बी ने गंभीरता से कहा-‘तो लॉक कर दिया जाये?' ’जी।' ’तो लॉक किया जाये। कम्प्यूटर जी, जवाब लॉक करें, आपका जवाब है, सी-सरकार।'

जवाब लॉक कर दिया गया। थोड़े सन्नाटे के बाद बजर बजा। बिग बी अपनी सीट से उठ खड़े हुए और बोले- ‘ओ---ह।’ बैठे हुए प्रतियोगी के साथ-साथ कार्यक्रम में सम्मिलित लोगों में कौतूहल जाग गया। वे भी उठ कर कर खड़े हो गये।
’यह जवाब ग़लत है।' बिग बी के बोलते ही सन्नाटा छा गया। बिग बी ने प्रतियोगी से कहा- ‘आपका जवाब ग़लत था।
सही जवाब है- ‘जनता..!!